सलमा तिवारी
ये बात है बहुत पुरानी
यानि हमारे पिछले जन्म की कहानी।
तब हम मिस्टर तिवारी हुआ करते थे।
और अपने मौहल्ले में रहने वाली सलमा पर मरते थे।
बड़े बूढ़े हमारे सलमा पर मरने को गलत बताते थे।
सारे दिन बैठ कर हमारे पिताजी को समझाते थे।
कि लड़के से कहो कुछ काम धाम करे।
मरना ही है तो देश पे मरे।
अब इन बड़े बूढ़ों को कौन समझाए।
कि हम नौजवानों के लिए अपना देश ... more > (4 pages)
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uploaded by durwesh
tags / इन्टरव्यू कविता देश दोस्तों मौहल्ला सलमा हल्ला
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